Posted on March 31, 2007 by arunima
सभी आदरणीय अग्रजों के स्नेह को अल्फ़ाज़ बयान नहीं कर सकते. मेरी यह प्रस्तुति आपके कसौटी पर कैसी उतरेगी, इस की प्रतीक्षा रहेगी.
जितने भी उठते सवाल हैं उनके उत्तर आँसू हैं
जिस पर आकर रुके हुए हम, उसी द्वार पर आंसू हैं
साथ छोड़ कर गया हर बशर, सब मौके के साथी थे
साथ निभाता रहे हमारा,जो कि [...]
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Posted on March 29, 2007 by arunima
दोस्तो
काफ़ी दिनों से इतने अच्छे ब्लाग पढ़ने के बाद दोचा कि मैं भी अपना योग दूँ. इसलिये यह मेरी पहली पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत है. एक गज़ल के साथ
न जाने कितने दरद सजाकर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
छुपाये कुछ, कुछ किये उजागर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
जो रह गया है परे पलक [...]
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Posted on March 29, 2007 by arunima
दोस्तो
काफ़ी दिनों से इतने अच्छे ब्लाग पढ़ने के बाद दोचा कि मैं भी अपना योग दूँ. इसलिये यह मेरी पहली पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत है. एक गज़ल के साथ
न जाने कितने दरद सजाकर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
छुपाये कुछ, कुछ किये उजागर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
जो रह गया है परे पलक [...]
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