हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
Posted on March 29, 2007 by arunima
दोस्तो
काफ़ी दिनों से इतने अच्छे ब्लाग पढ़ने के बाद दोचा कि मैं भी अपना योग दूँ. इसलिये यह मेरी पहली पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत है. एक गज़ल के साथ
न जाने कितने दरद सजाकर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
छुपाये कुछ, कुछ किये उजागर, हम अपनी गज़लों में रख रहे हैं
जो रह गया है परे पलक [...]
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