शोले नहीं उगलती

पहले जैसी बात नहीं हौ अब वीणा के तारों में
जयचंदों की भीड़ बढ़ी है गलियों में चौबारों में

आस्तीन के सांपों को तुम कब तक दूध पिलाओगे
फ़र्श खोदते हैं ये उसका, रहते जिन गलियारों में

एक शुआ से शीशे जैसे लम्हे भर क्या चमक गये
ख्वाबीदा हैं जर्रे बैठे  सूरज चाँद सितारों में

सावन के अंधों की क्या है [...]

कोई तो तासीर बताये

ख्वाब तोड कर पूछ रहे हैं कोई तो ताबीर बताये
भड़का कर शोले कहते हैं, कोई आ तासीर बताये
कल तक चम्बल के कछार की गुमनामी का वाशिन्दा था
आज यहां संसद के गलियारे अपनी जागीर बताये
ज़ख्म हुई जानों से हाकिम, हमदर्दी जतला कहता है
देंगे उसे सजायें , कोई  कहाँ छुपी शमशीर बताये
रामराज्य था कभी यहाँ पर, कहते [...]

बनती एक गज़ल

दर्द पिघलता रहा आँख से आंसू बन बन कर
हर्फ़ों में पिघला होता तो बनती एक गज़ल
छोड़ा नहीं आपने मेरे ख्वाबों का दामन
यादों का थामा होता तो बनती एक गज़ल
तन्हा होकर भी हम कितने तन्हा होते हैं?
सच में यदि होती तन्हाई, बनती एक गज़ल
आईने की आँखों में जो चेहरा दिखता है
उसको अगर जान पाते तो बनती [...]

झुकना हमें भी गवारा नहीं है

यूँ झुकना हमें भी गवारा नहीं है
मगर हमने बोझा उतारा नहीं है
कदम लड़खड़ाये जरा इसलिये भी
कि बैसाखियों का सहारा नहीं है
नहीं तैरता कोई ताउम्र इसमें
ये दरिया है जिसका किनारा नहीं है
ये इक सुर्ख शै जिससे दामन बचाते
ये दिल है हमारा अँगारा नहीं है
अँधेरी सियाह रात में टिमटिमाता
दिया जल रहा है, सितारा नहीं है
कभी तुम बढ़ोगे [...]

कहीं तो होगा

जाग सके मेरे लफ़्ज़ों से वह अहसास कहीं तो होगा
तुमसे बातें करते करते यह आभास कहीं तो होगा
सिंहासन पर ताजपोशियों की खातिर बढ़ती भीड़ों में
जो पत्थर को भी जीने का दे विश्वास, कहीं तो होगा
साठ बरस वादों के टुकड़ों पर पल कर भी ख्वाबीदा है
जो इन्सान बना न अब तक ज़िन्दा लाश कहीं तो होगा
बरस [...]

इस दरिया के साहिल में

जिन गज़लों के अशआरों से तुमने हमें नवाजा था
आज उन्ही को साथ लिये हम आये हैं इस महफ़िल में
राहेगुजर की तकलीफ़ों ने जितना हमें सुकून दिया
उतनी लज्जत मिली न हमको कदम चूमती मंज़िल में
लब पर खिलती हुई तबस्सुम,हँस हँस कर बतलाती है
तल्खी के कितने पैमाने छलके होंगे इस दिल में
कब सोचा था उस बूढ़े ने [...]

तलवार बने

फिर से गली मोहल्लों में है लगता कुछ हथियार तने
नफ़रत को कुछ और हवा देनेवाले औज़ार बने
साम्प्रदायिकता के अलाव पर ताप रहे हैं हाथों को
अपना उल्लू सीधा करने की खातिर मुख्त्यार बने
कल तक टूटे फ़ालों वाले रहे भौंथरे चाकू जो
ज्यों ही लगा हाथ में मौका, नाम बदल तलवार बने
खबर इन्हें है साहिल बनना एक शहादत [...]

रस्ता तकती रहती है

जाने क्यों आँखों में अक्सर एक नमी सी रहती है
एक नदी है जो बारिश के बिन भी बहती रहती है
जिस बस्ती की धुंधली यादें भी अब बाकी रही नहीं
वहाँ आस इक बूढ़ी अब भी रस्ता तकती रहती है
पहले नजरें मिली, और फिर लब ने लब से बातें की
दीवारे-अजनबियत   जो   है   ढहते   ढहते   ढहती है
तुमसे ज्यादा निकट [...]

आदत तो देखिये

ज़ुल्फ़ों की जुम्बिशों से हुए कत्ल दस दफ़ा
इन बाँकुरों की आज शहादत तो देखिये
ज़िक्रे शमा से लब पे फ़फ़ोले पड़े हजार
वल्लाह नाजनीं की नजा़कत तो देखिये
पूछे है आफ़ताब से शब की वो दास्तां
अपने नुमाईंदे की हिमाकत तो देखिये
शिकवे खुदा से आप मुहब्बत के कीजिये
कैसी लिखी किताब में आयत तो देखिये
समझे न ढाई लफ़्ज़ का छोटा [...]

मेरा परिचय

मेरा परिचय पूछने वाले, बस इतना है परिचय मेरादर्द भरी गज़लों की नगरी की मैं कोई शहजादी हूँ
अल्फ़ाज़ों ने गोद खिलाया, शब्दों ने लोरियां सुनाईसर पर साया बन कर मेरे, साथ रही मेरी परछाईंमुझे मदरसे ने किताब के किसी सफ़े से दूर रखा थाइसी लिये गीतों गज़लों की मैं अनगिन किताब पढ़ पाई
वैसे एक पहाड़ी [...]