पीर भी गाती नहीं

साहिले दरिया है कैसा, मौज इक आती नहीं
शंख, कंकर, सीप कुछ भी साथ में लाती नहीं
दौर ये कैसा जमाने का चला, हैरत में हूँ
पीर भी तो अब लिये उजरत बिना गाती नहीं
हम चले हैं, हम रुके, उनके इशारे देखकर
आज उनको ही हमारी ये अदा भाती नहीं
न दरद है, न ज़खम है और न तन्हाई है
बस [...]