मेरा परिचय
Posted on April 4, 2007 by arunima
मेरा परिचय पूछने वाले, बस इतना है परिचय मेरा
दर्द भरी गज़लों की नगरी की मैं कोई शहजादी हूँ
अल्फ़ाज़ों ने गोद खिलाया, शब्दों ने लोरियां सुनाई
सर पर साया बन कर मेरे, साथ रही मेरी परछाईं
मुझे मदरसे ने किताब के किसी सफ़े से दूर रखा था
इसी लिये गीतों गज़लों की मैं अनगिन किताब पढ़ पाई
वैसे एक पहाड़ी की छोटी सी फ़ूल भरी वादी में
जो लहरों में चमका करती, मैं बस वह पिघली चाँदी हूँ
चंचल एक हवा के झोंके सा हर वन-उपवन है मेरा
कभी दुपहरी में रहती हूँ, घेरे रहता कभी अँधेरा
दिशा काल की सीमाओं में बँधने की न पड़ी जरूरत
जहाँ सांझ को सूरज छिपता, हो जाता है वह घर मेरा
पूर्ण विरामों के पथ चलती ले जिज्ञासा भरी नजर को
परिधि के कोने पर बैठी, अर्ध-व्यास सी नैं आधी हूँ
मैं गज़लों की शहज़ादी हूँ
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गज़लों की शहज़ादी… बहुत ही खूब िलखा है आप्ने!
आपका अंदाज़ बहुत पसंद आया.. यूँही िलख्ते रिहये…
मन का सागर बेहद गहरा
उसकी निधी पर अधरों का पहरा
दर्द का ताप जब भाप बनाता
भाव उमड़ कविता बन जाता ।।
Great!
बहुत अच्छा है परिचय आपका.
Excellent!
बढिया है , और पढनें की इच्छा रहेगी ।
अरुणिमा जी
सुन्दर रचना.. है दिल को छूती हुई…लिखते रहिये…हम पढने के लिये आते रहेंगे
Achchha laga aapka parichay padhkar.
स्वागत है आपका
Thats cool. Welcome to bloggers world.
Rajesh roshan