आदत तो देखिये
Posted on April 5, 2007 by arunima
ज़ुल्फ़ों की जुम्बिशों से हुए कत्ल दस दफ़ा
इन बाँकुरों की आज शहादत तो देखिये
ज़िक्रे शमा से लब पे फ़फ़ोले पड़े हजार
वल्लाह नाजनीं की नजा़कत तो देखिये
पूछे है आफ़ताब से शब की वो दास्तां
अपने नुमाईंदे की हिमाकत तो देखिये
शिकवे खुदा से आप मुहब्बत के कीजिये
कैसी लिखी किताब में आयत तो देखिये
समझे न ढाई लफ़्ज़ का छोटा सा इक सवाल
तालीम याफ़्ता ये जहालत तो देखिये
मेरी गज़ल पे कहता मुकर्रर पचास बार
कितनी हसीं है दोस्त की आदत तो देखिये
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nice poem.
>शिकवे खुदा से आप मुहब्बत के कीजिये
>कैसी लिखी किताब में आयत तो देखिये
बहुत अच्छा लिखा है , बधाई ।
मुंसिफ़ कटघरे में खड़े,मुजरिम करें सवाल
बदले हुए ज़माने की रवायत तो देखिये
मुंसिफ़ कटघरे में खड़े,मुजरिम करें सवाल
बदले हुए ज़माने की रवायत तो देखिये
अच्छी गज़ल है …