रस्ता तकती रहती है

जाने क्यों आँखों में अक्सर एक नमी सी रहती है
एक नदी है जो बारिश के बिन भी बहती रहती है
जिस बस्ती की धुंधली यादें भी अब बाकी रही नहीं
वहाँ आस इक बूढ़ी अब भी रस्ता तकती रहती है
पहले नजरें मिली, और फिर लब ने लब से बातें की
दीवारे-अजनबियत   जो   है   ढहते   ढहते   ढहती है
तुमसे ज्यादा निकट [...]