रस्ता तकती रहती है
Posted on April 8, 2007 by arunima
जाने क्यों आँखों में अक्सर एक नमी सी रहती है
एक नदी है जो बारिश के बिन भी बहती रहती है
जिस बस्ती की धुंधली यादें भी अब बाकी रही नहीं
वहाँ आस इक बूढ़ी अब भी रस्ता तकती रहती है
पहले नजरें मिली, और फिर लब ने लब से बातें की
दीवारे-अजनबियत जो है ढहते ढहते ढहती है
तुमसे ज्यादा निकट तुम्हारे, कोई और नहीं होगा
रोज शाम मेरी तन्हाई मुझसे आकर कहती है
आँधी- तूफ़ाँ, बारिश ओले सब कुछ उसे गवारा है
वह चौराहे की प्रतिमा है, जाने क्या क्या सहती है
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Good!
अच्छा लिखा है आपने …..बधाई
vaah vaah
बहुत खूब, वाह वाह..हर पंक्ति सुंदर है, बधाई!!
nice xpressions