तलवार बने
Posted on April 9, 2007 by arunima
फिर से गली मोहल्लों में है लगता कुछ हथियार तने
नफ़रत को कुछ और हवा देनेवाले औज़ार बने
साम्प्रदायिकता के अलाव पर ताप रहे हैं हाथों को
अपना उल्लू सीधा करने की खातिर मुख्त्यार बने
कल तक टूटे फ़ालों वाले रहे भौंथरे चाकू जो
ज्यों ही लगा हाथ में मौका, नाम बदल तलवार बने
खबर इन्हें है साहिल बनना एक शहादत [...]
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