कहीं तो होगा
Posted on April 16, 2007 by arunima
जाग सके मेरे लफ़्ज़ों से वह अहसास कहीं तो होगा
तुमसे बातें करते करते यह आभास कहीं तो होगा
सिंहासन पर ताजपोशियों की खातिर बढ़ती भीड़ों में
जो पत्थर को भी जीने का दे विश्वास, कहीं तो होगा
साठ बरस वादों के टुकड़ों पर पल कर भी ख्वाबीदा है
जो इन्सान बना न अब तक ज़िन्दा लाश कहीं तो होगा
बरस [...]
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