बनती एक गज़ल

दर्द पिघलता रहा आँख से आंसू बन बन कर
हर्फ़ों में पिघला होता तो बनती एक गज़ल
छोड़ा नहीं आपने मेरे ख्वाबों का दामन
यादों का थामा होता तो बनती एक गज़ल
तन्हा होकर भी हम कितने तन्हा होते हैं?
सच में यदि होती तन्हाई, बनती एक गज़ल
आईने की आँखों में जो चेहरा दिखता है
उसको अगर जान पाते तो बनती [...]