उस महफ़िल में जाना क्या
Posted on April 3, 2007 by arunima
महफ़िल की खातिर गज़लों का सुनना और सुनाना क्याजिस महफ़िल में सब शायर हों, उस महफ़िल में जाना क्या
बस्ती हो सहरा हो या फ़िल चौराहे का जलसा होएक अकेले तन्हा दिल का हँसना, अश्क बहाना क्या
जिस छत की अलगनियों पर, केवल समझौते लटके हैंउस पर इंकलाब का परचम, जाकर फ़िर फ़हराना क्या
चौपालें थीं, किस्से भी [...]
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