उस महफ़िल में जाना क्या

महफ़िल की खातिर गज़लों का सुनना और सुनाना क्याजिस महफ़िल में सब शायर हों, उस महफ़िल में जाना क्या
बस्ती हो सहरा हो या फ़िल चौराहे का जलसा होएक अकेले तन्हा दिल का हँसना, अश्क बहाना क्या
जिस छत की अलगनियों पर, केवल समझौते लटके हैंउस पर इंकलाब का परचम, जाकर फ़िर फ़हराना क्या
चौपालें थीं, किस्से भी [...]

पीर भी गाती नहीं

साहिले दरिया है कैसा, मौज इक आती नहीं
शंख, कंकर, सीप कुछ भी साथ में लाती नहीं
दौर ये कैसा जमाने का चला, हैरत में हूँ
पीर भी तो अब लिये उजरत बिना गाती नहीं
हम चले हैं, हम रुके, उनके इशारे देखकर
आज उनको ही हमारी ये अदा भाती नहीं
न दरद है, न ज़खम है और न तन्हाई है
बस [...]