Posted on May 31, 2007 by arunima
करवट लेकर समय बदलता हमको काम बदलने होंगे
चलन ज़माने का ऐसा है, हमको नाम बदलने होंगें
साकी की आंखों से मय अब हाला बन कर उबल रही है
मयखाने में उठा जलजला, हमको जाम बदलने होंगें
अपने बूते पर मंज़िल तक चलने की अब रीत नहीं है
बैसाखी कांधों के नीचे, हमको पांव बदलने होंगे
बस्ती का मुखिया करता है चोर [...]
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Posted on May 29, 2007 by arunima
सूरज चाँद सितारे उनके गुलदानों में कैद हुए
साथ हमारा रहा निभाता, एक सिरफ़ अंधियारा ही
शहदीले सपने चाहे जितने भी भर लो आँखों में
टपकेगा उनसे जो ,होगा केवल आँसू खारा ही
चाहे देखो नफ़रत से या उसे हिकारत से देखो
अल्ला का बन्दा रहता है उसको हरदम प्यारा ही
बुझी राख को उलटो पलटो, खूब हवायें दे देखो
भड़काता है आग [...]
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Posted on May 20, 2007 by arunima
सोच रहे हैं तुम कह दो तो एक कहानी लिख देंगें
लोहू उबला नहीं हुआ है कैसे पानी लिख देंगें
कलम हो चुके हाथों में कब कलम कोई रुक पाती है
कैसे एक कलम की देखो रुकी रवानी लिख देंगें
कैद कफ़स में सुखनवरी के तायर थे जो आवारा
मोल भाव करते करते जो लुटी जवानी लिख देंगें
कासिद के हाथों [...]
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Posted on May 17, 2007 by arunima
यौं तो हम पर पहले से ही थे उनके अहसान बहुत
और मोड़ने लगे इधर जो आते हैं तूफ़ान बहुत
वक्त मिलेगा अगर कभी तो उनको शाया कर देंगे
लिख कर रखे हुए हैं हमने गज़लों के दीवान बहुत
दोमाले पर जाकर जबसे बैठे, तब से बदल गये
कल तक जिन का दावा सबसे है उनकी पहचान बहुत
साया-ए-लश्कर में चलते [...]
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Posted on May 2, 2007 by arunima
हम मरुस्थल की जमीं से , आन में दरके बहुत
बादलों से भीख पर मांगी नहीं बरसात की
आँज कर घनश्याम हमने नैन में अब रख लिये
अब न सुरमे की , न काजल की न चाहत रात की
ढूँढ़ते बाज़ार में पीतल मुलम्मा जो चढ़ा
जब गंवा दीं स्वर्ण की जो चूड़ियां थी हाथ की
था सुना विषधर रहा करते [...]
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