अब न चाहत रात की

हम मरुस्थल की जमीं से , आन में दरके बहुत
बादलों से भीख पर मांगी नहीं बरसात की
आँज कर घनश्याम हमने नैन में अब रख लिये
अब न सुरमे की , न काजल की न चाहत रात की
ढूँढ़ते  बाज़ार में   पीतल      मुलम्मा     जो चढ़ा
जब गंवा दीं स्वर्ण की जो   चूड़ियां थी हाथ की
था सुना विषधर रहा करते [...]