अब न चाहत रात की
Posted on May 2, 2007 by arunima
हम मरुस्थल की जमीं से , आन में दरके बहुत
बादलों से भीख पर मांगी नहीं बरसात की
आँज कर घनश्याम हमने नैन में अब रख लिये
अब न सुरमे की , न काजल की न चाहत रात की
ढूँढ़ते बाज़ार में पीतल मुलम्मा जो चढ़ा
जब गंवा दीं स्वर्ण की जो चूड़ियां थी हाथ की
था सुना विषधर रहा करते [...]
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