एक कहानी लिख देंगे

सोच रहे हैं तुम कह दो तो एक कहानी लिख देंगें

लोहू उबला नहीं हुआ है कैसे पानी लिख देंगें

कलम हो चुके हाथों में कब कलम कोई रुक पाती है

कैसे एक कलम की देखो रुकी रवानी लिख देंगें

कैद कफ़स में सुखनवरी के तायर थे जो आवारा

मोल भाव करते करते जो लुटी जवानी लिख देंगें

कासिद के हाथों भेजे जाने वाले पैगामों में

गुलशन में छाई जो सहरा की वीरानी लिख देंगें

मनमोहन की बाँसुरिया पर कितने दिल कुर्बान हुए

एक नहीं थी राधा ही उसकी दीवानी लिख देंगें

शाहराह से फ़ुटपाथों तक सिर्फ़ मुखौटे चलते हैं

कोई सूरत एक नहीं जानी पहचानी लिख देंगें

तुम जो कहते हो वैसा ही होता रहा निजामों में

तुम कह दो तो तुम को फिर जिल्ले सुभहानी लिख देंगें

4 Responses to “एक कहानी लिख देंगे”

  1. अच्छा लिखा है!

  2. अरूणिमा जी, उर्दु शब्दों का अर्थ भी लिख देतीं तो अधिक समझ आती ।
    घुघूती बासूती

  3. तुम जो कहते हो वैसा ही होता रहा निजामों में

    तुम कह दो तो तुम को फिर जिल्ले सुभहानी लिख देंगें

    –बहुत खूब. अगर टिप्पणी पढ़ती हो, तो घुघूती जी की बात हमारी भी समझी जाये. :)

  4. घुघूतीजी एवं समीरजी

    आपका धन्यवाद, इस ओर ध्यान दिलाने के लिये

    कासिद–सन्देशवाहक
    तायर - पंछी
    सुखनवरी - शायरी
    कफ़स — कैदखाना
    सहरा - जंगल
    जिल्ले-सुभानी - आलम पनाह, सम्राट
    निजाम - राज्य
    रवानी - बहाव
    शाहराह –राजपथ

    अरुणिमा

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