एक कहानी लिख देंगे
Posted on May 20, 2007 by arunima
सोच रहे हैं तुम कह दो तो एक कहानी लिख देंगें
लोहू उबला नहीं हुआ है कैसे पानी लिख देंगें
कलम हो चुके हाथों में कब कलम कोई रुक पाती है
कैसे एक कलम की देखो रुकी रवानी लिख देंगें
कैद कफ़स में सुखनवरी के तायर थे जो आवारा
मोल भाव करते करते जो लुटी जवानी लिख देंगें
कासिद के हाथों भेजे जाने वाले पैगामों में
गुलशन में छाई जो सहरा की वीरानी लिख देंगें
मनमोहन की बाँसुरिया पर कितने दिल कुर्बान हुए
एक नहीं थी राधा ही उसकी दीवानी लिख देंगें
शाहराह से फ़ुटपाथों तक सिर्फ़ मुखौटे चलते हैं
कोई सूरत एक नहीं जानी पहचानी लिख देंगें
तुम जो कहते हो वैसा ही होता रहा निजामों में
तुम कह दो तो तुम को फिर जिल्ले सुभहानी लिख देंगें
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अच्छा लिखा है!
अरूणिमा जी, उर्दु शब्दों का अर्थ भी लिख देतीं तो अधिक समझ आती ।
घुघूती बासूती
तुम जो कहते हो वैसा ही होता रहा निजामों में
तुम कह दो तो तुम को फिर जिल्ले सुभहानी लिख देंगें
–बहुत खूब. अगर टिप्पणी पढ़ती हो, तो घुघूती जी की बात हमारी भी समझी जाये.
घुघूतीजी एवं समीरजी
आपका धन्यवाद, इस ओर ध्यान दिलाने के लिये
कासिद–सन्देशवाहक
तायर - पंछी
सुखनवरी - शायरी
कफ़स — कैदखाना
सहरा - जंगल
जिल्ले-सुभानी - आलम पनाह, सम्राट
निजाम - राज्य
रवानी - बहाव
शाहराह –राजपथ
अरुणिमा