होता ज़िक्र हमारा ही

सूरज चाँद सितारे उनके गुलदानों में कैद हुए
साथ हमारा रहा निभाता, एक सिरफ़ अंधियारा ही
शहदीले सपने चाहे जितने भी भर लो आँखों में
टपकेगा उनसे जो ,होगा केवल आँसू खारा ही
चाहे देखो नफ़रत से या उसे हिकारत से देखो
अल्ला का बन्दा रहता है उसको हरदम प्यारा ही
बुझी राख को उलटो पलटो, खूब हवायें दे देखो
भड़काता है आग [...]