क्या है बाकी नाम में
Posted on June 13, 2007 by arunima
उजड़े हुए खेत ही केवल बाकी अब इस गांव में
पगडंडी पर कांटे बिखरे, छाले अनगिन पांव में
सूरज ने मौसम से मिल कर कैसे हैं षड़यंत्र रचे
आग बरसती रहती है बूढ़े बरगद की छांव में
जाने कैसे करवट लेकर वक्त पड़ा है बिस्तर पर
सरगम के सारे स्वर बन्दी, कर्कश कांव कांव में
एक नाम की खातिर वो भी [...]
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