सब चेहरे अनजाने हैं

वो कहते थे चौपालों पर आज नये अफ़साने हैं
सुना, नाम बदले हैं लेकिन किस्से वही पुराने हैं
अंधों की सत्ता में मिलती रहीं रेवड़ी उनको ही
जो खुद अंधे हैं या जिनके अंधों से याराने हैं
बन कर आज मुकादम, अपने लिये कसीदे पढ़वाते
सभी जानते हैं कि पैंतरे ये उनके बचकाने हैं
पगडंडी पर बिछी हुईं हैं नजरें अपनी [...]