ये बरसात

आलिंगन में सुलगे तन की यादों वाली ये बरसात
भीगे कपड़े,  सुलगे तन को देती गाली ये बरसात
अमराई में खनकाती सी चूड़ी चढ़ती पींगों में
टपक रही छत से भरती है बर्तन खाली ये बरसात
चाँद रात से महकाती सी कुछ सपने कुछ आंखों में
लाती है पहाड़ सी लम्बी, रातें काली ये बरसात
खिड़की पर बादल का टुकड़ा संदेशे [...]