ये बरसात
Posted on August 2, 2007 by arunima
आलिंगन में सुलगे तन की यादों वाली ये बरसात
भीगे कपड़े, सुलगे तन को देती गाली ये बरसात
अमराई में खनकाती सी चूड़ी चढ़ती पींगों में
टपक रही छत से भरती है बर्तन खाली ये बरसात
चाँद रात से महकाती सी कुछ सपने कुछ आंखों में
लाती है पहाड़ सी लम्बी, रातें काली ये बरसात
खिड़की पर बादल का टुकड़ा संदेशे [...]
Filed under: Uncategorized | 6 Comments »