हम भी गज़ल लिखे

ज़माने भर का चलन है ऐसा खराब, हम भी गज़ल लिखें हैं
जिसे भी देखो वही कहे है जनाब, हम भी गज़ल लिखे हैं
न लालो-गुल है न मीनो-सागर,न है तबस्सुम जरा लबों पर
न जाने कोई, कहां पे छलकी शराब, हम भी गज़ल लिखे हैं
उठी हैं नजरें जिधर से गुजरे,है बात दीगर कोई न बोले
मगर छुपाये कहां [...]