हम भी गज़ल लिखे
Posted on August 7, 2007 by arunima
ज़माने भर का चलन है ऐसा खराब, हम भी गज़ल लिखें हैं
जिसे भी देखो वही कहे है जनाब, हम भी गज़ल लिखे हैं
न लालो-गुल है न मीनो-सागर,न है तबस्सुम जरा लबों पर
न जाने कोई, कहां पे छलकी शराब, हम भी गज़ल लिखे हैं
उठी हैं नजरें जिधर से गुजरे,है बात दीगर कोई न बोले
मगर छुपाये कहां [...]
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