कुछ टूटा था

लम्हे भर में एक दहाई का रिश्ता झट से टूटा था
मैं हैरां थी रही सोचती वो  मुझसे क्योंकर रूठा था
मेरे घर की छत पर से जो बिन बरसे फिर से गुजरा है
उस बादल की  खता नहीं है, मेरा ही न्यौता झूठा था
जो हासिल को अपनी कुव्वत का रह रह दे नाम रहे
उनको खबर नहीं बिल्ली के [...]