दीपक नहीं जले

दीवाली तो आई लेकिन दीपक नहीं जले
ऐसे जमे हुए रिश्ते थे, जरा नहीं पिघले
जिनसे परिचय नहीं हुए वे दुश्मन भी तो क्या
शिकवा उनसे है सीने में जो दिन रात पले
दोपहरी  की   धूप   गंवाई   इंतज़ार लेकर
अहसासों पर जमी हुई थोड़ी तो बर्फ़ गले
एक बार भी मुड़ कर उसने हमें नहीं देखा
हम अपने साये के पीछे सारी [...]

सोता रह गया

जो न होना था यहां, बस वो ही होता रह गया
मुस्कुराना था जिसे, वो सिर्फ़ रोता रह गया
काफ़िले दहलीज तक आये व आगे बढ़ गये
और वो गफ़लत का मारा सिर्फ़ सोता रह गया
अब्र बरसे ख्वाब के हर रात ही दालान में
एक वो था, नींद के बस बीज बोता रह गया
शेख ने तस्वीह जो दी, टूट [...]

खंज़र उतर गया

सीने में उसकी बात का खंज़र उतर गया
इक देवता था जो मेरे भीतर वो मर गया
शुबहों की गुफ़्तगू बढ़ी है इस कदर यहाँ
बेखौफ़ जो था , वो महज साये से डर गया
वो इक शजर कि जिससे थी उम्मीद छांह की
पुरबाई क्या चली कि वो जड़ से उखड़ गया
राहों को  नापने में लगे रह   गये         [...]