खंज़र उतर गया

सीने में उसकी बात का खंज़र उतर गया
इक देवता था जो मेरे भीतर वो मर गया
शुबहों की गुफ़्तगू बढ़ी है इस कदर यहाँ
बेखौफ़ जो था , वो महज साये से डर गया
वो इक शजर कि जिससे थी उम्मीद छांह की
पुरबाई क्या चली कि वो जड़ से उखड़ गया
राहों को  नापने में लगे रह   गये         [...]