दीपक नहीं जले
Posted on September 19, 2007 by arunima
दीवाली तो आई लेकिन दीपक नहीं जले
ऐसे जमे हुए रिश्ते थे, जरा नहीं पिघले
जिनसे परिचय नहीं हुए वे दुश्मन भी तो क्या
शिकवा उनसे है सीने में जो दिन रात पले
दोपहरी की धूप गंवाई इंतज़ार लेकर
अहसासों पर जमी हुई थोड़ी तो बर्फ़ गले
एक बार भी मुड़ कर उसने हमें नहीं देखा
हम अपने साये के पीछे सारी [...]
Filed under: Uncategorized | 3 Comments »