अत्तार की गली से

वो एक झोंका लगा था आया यहां पे अत्तार की गली से
जो पूछा, बोला लगा के दस्तक तुम्हारे दर पर इधर बढ़ा है
तुम्हें ये शायद खबर नहीं है, मगर बताती है ये शाहकारी
बड़ी ही फ़ुरसत से ये मुजस्सिम,खुदा के हाथों गया गढ़ा है
न आई होली, न महकी सरसों न फूले टेसू, न संवरी बौरें
मगर फ़िज़ां [...]