नायाब हैं हम

कहने को कोई बात नहीं, पर बात है कुछ बेताब हैं हम
अपना ही पता मिल न पाया क्या बात है क्यों नायाब हैं हम
पलकों के दरीचे में बैठे, बस राह निहारा करते हैं
पैबस्त न होते आंखों  में, कुछ ऐसे टूटे ख्वाब हैं हम
सर से छत उड़ी सहारे की दीवारें भी सब ध्वस्त हुईं
पर हिले न अपनी जड़ से [...]