आज सुना जाते हैं
Posted on December 27, 2007 by arunima
वो लिख देते रोज और हम कभी कभी ही लिख पाते हैं
वो कहते हर बात, हमें क्या कहना सोच नहीं पाते हैं
टकसाली सिक्कों की तो बहुतायत मिलती गली गली में
कारीगरी मिले जिनमें वे कभी कभी ही मिल पाते हैं
एक और शायर कलाम पढ़ गया ज़ीस्त की महफ़िल में आ
आगे आने वाले देखें क्या क्या नज़राने लाते हैं
जो मशाल ले राहनुमाई की बातें करते रहते हैं
शाम ढले पर चौराहों के वे ही दिये बुझा जाते हैं
कल ये मौसम हो या न हो, कल ये चज़्म रहे या उजड़े
यही सोच कर हाले दिल हम अपना आज सुना जाते हैं
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behad badiya
कल भी आप की प्रतीक्षा रहेगी।
बेहतरीन रचना पढ़ने को मिली… बेहत भावमय…!!!