वैसा तो कुछ कहा नहीं था

तुमने जो कुछ समझा, हमने  वैसा तो कुछ कहा नहीं था
क्योंकि अपरिचय का जो पुल था बीच हमारे ढहा नहीं था
 
कैसे हम उनके अश्कों की कथा  ज़माने को    बतलाते
जो कुछ उन पर बीता, हमने वैसा कुछ भी सहा नहीं था
 
जाने कैसे डूब गये वो, न तो खबर     बाढ़ की आई
बाँध तोड़ कर रेला भी कोई बस्ती [...]

वज़्म में कोई सुनाये

हम गज़ल की गुनगुनी गरमाहटोम में जब नहाये
मीत तेरे चित्र उस पल पास आकर मुस्कुराये

झूमती पगडंडियों ने जब कदम चूमे हमारे
यों लगा पग के अलक्तक सामने आ मुस्कुराये

पत्तियों के जब झरोखों से हवा ने झांक देखा
घुंघरुओं की नींद टूटी, कसमसाये झनझनाये

ख्वाब में रिश्ते हजारों दीप बन कर जल रहे थे
साजिशों की रोशनी में रह गये [...]

पत्थर बहुत सारे

उड़ रहे हैं अब हवा में पर बहुत सारे
झुक रहे हैं पांव में अब सर बहुत सारे

क्या वज़ह थी कोई भी ये जान न पाया
बस्तियों में जल रहे हैं घर बहुत सारे
एक दो हों तो मुनासिब, सामना कर लें
ज़िन्दगी के सामने हैं डर बहुत सारे

हो नहीं पाया नफ़े का कोई भी सौदा
एक तनख्वाह और उस [...]

राम नहीं हो

नाम ढूँढ़ते हैं इक ऐसा, जैसा कोई नाम नहीं हो
सूरज निकले दोपहरी हो, लेकिन उसकी शाम नहीं हो

हमसे  सबको उम्मीदें हैं, जुदा नहीं हो तुम भी इससे
हम तो बन जायेंगे लक्षमण, लेकिन तुम ही राम नहीं हो

किस्सागोई की आदत तो साथ रही अपने सदियों से
लेकिन फिर भी ये चाहा है सारे किस्से आम नहीं हो

ज़ुल्फ़ों [...]

आज सुना जाते हैं

वो लिख देते रोज और हम कभी कभी ही लिख पाते हैं
वो कहते हर बात, हमें क्या कहना सोच नहीं पाते हैं

टकसाली सिक्कों की तो बहुतायत मिलती गली गली में
कारीगरी मिले जिनमें वे कभी कभी ही मिल पाते हैं

एक और शायर कलाम पढ़ गया ज़ीस्त की महफ़िल में आ
आगे  आने   वाले   देखें   क्या    क्या   नज़राने [...]

हम भी तो हैं दीवाने

जाने कितने लोग हुए हैं इन गज़लों के दीवाने
दीगर है ये बात  मान ले कोई, चाहे न माने
देती है तारीख गवाही, ऐसे दीवाने पन की
इसने ही तो लिखवाये हैं वर्क  वर्क पर अफ़साने
खतावार है कौन ? सवाली होना होता आसां है
शमा नहीं तो कुरबानी को जायें कहां पर परवाने
सुखनवरी की इन गलियों में हम भी [...]

नायाब हैं हम

कहने को कोई बात नहीं, पर बात है कुछ बेताब हैं हम
अपना ही पता मिल न पाया क्या बात है क्यों नायाब हैं हम
पलकों के दरीचे में बैठे, बस राह निहारा करते हैं
पैबस्त न होते आंखों  में, कुछ ऐसे टूटे ख्वाब हैं हम
सर से छत उड़ी सहारे की दीवारें भी सब ध्वस्त हुईं
पर हिले न अपनी जड़ से [...]

अत्तार की गली से

वो एक झोंका लगा था आया यहां पे अत्तार की गली से
जो पूछा, बोला लगा के दस्तक तुम्हारे दर पर इधर बढ़ा है
तुम्हें ये शायद खबर नहीं है, मगर बताती है ये शाहकारी
बड़ी ही फ़ुरसत से ये मुजस्सिम,खुदा के हाथों गया गढ़ा है
न आई होली, न महकी सरसों न फूले टेसू, न संवरी बौरें
मगर फ़िज़ां [...]

दीपक नहीं जले

दीवाली तो आई लेकिन दीपक नहीं जले
ऐसे जमे हुए रिश्ते थे, जरा नहीं पिघले
जिनसे परिचय नहीं हुए वे दुश्मन भी तो क्या
शिकवा उनसे है सीने में जो दिन रात पले
दोपहरी  की   धूप   गंवाई   इंतज़ार लेकर
अहसासों पर जमी हुई थोड़ी तो बर्फ़ गले
एक बार भी मुड़ कर उसने हमें नहीं देखा
हम अपने साये के पीछे सारी [...]

सोता रह गया

जो न होना था यहां, बस वो ही होता रह गया
मुस्कुराना था जिसे, वो सिर्फ़ रोता रह गया
काफ़िले दहलीज तक आये व आगे बढ़ गये
और वो गफ़लत का मारा सिर्फ़ सोता रह गया
अब्र बरसे ख्वाब के हर रात ही दालान में
एक वो था, नींद के बस बीज बोता रह गया
शेख ने तस्वीह जो दी, टूट [...]