मौसम सदा सुहाना होगा

 
 

शिकवा करते हो शोलों के दरिया में से जाना होगा
किसने तुम से कहा प्यार का मौसम सदा सुहाना होगा
 
उनसे अगर मुख्तलिफ़ हों तो ख़तावार समझे जाते हैं
इश्क ख़ता है उनकी नजरों में, भरना हर्जाना होगा
 
उल्फ़त के चिराग रोशन हैण गुलदस्ते के पहलू में अब
जिसने नहर निकाली वो तो सचमुच ही दीवाना होगा
 
पत्थर की मूरत को छप्पन भोग, आदमी को दो टुकड़े
जो देता, क्या सच में उसका ईश्वर से याराना होगा
 
वज़्मे सुख़न के काबिल मिसरा देती नहीं कलम अब कोई
बिखरेंगे अशआरजहाँ जाकर मेरे, वीराना होगा

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